जब ज़िन्दगी थोड़ी बेपटरी हो जाये
जब ज़िन्दगी थोड़ी बेपटरी हो जाये,
हालात तुम्हारे प्रतिकूल हो जाये,
तब बेमतलब ही सही,
थोड़ा मुस्कुरा देना,
कुछेक ठहाके यूँ ही लगा लेना
गर न कर पाओ ये तो,
कुछ पुराने, सुनहरे पन्ने पलट लेना,
मेरे जैसा कोई अल्हड़ मिलेगा,
खींसे निपोरते, दांत दिखाते हुये,
थोड़ी देर रुक के निहार लेना,
फिर ख़ुद-ब-ख़ुद मुस्कुरा दोगे,
ख़ुशी के नही तो ग़म के ही सही,
दो चार कतरे आंसू गिरा दोगे,
मन हल्का हो जाएगा,
फिर खो जाना पुरानी यादों में,
जहां मिलेंगे ढेर सारे क़िरदार,
पास तो शायद ही उनमे से कोई हो,
मगर एक बार हेलो बोलने की कोशिश करना,
शायद कोई इसी इंतेज़ार में बैठा होगा,
रो पड़ेगा वो भी बिफर के तुम्हारे साथ,
फिर याद करना उन लम्हों को,
जो तुमने साथ गुज़ारे हों,
फिर बोलना अलविदा एक दूसरे को,
याद आ जायेगा वो गाना,
अलविदा, अलविदा तो नहीं,
एक टीस सी उठेगी मन में,
दबाना उसको और धीरे से बाय बोलना,
फिर लौट जाना अपनी दुनियां में,
प्यार लुटाना उनपे, जिनके लिए जीते होगे,
दिन और रात बीतते जाएंगे,
महीने बरस गुज़र रहे होंगे,
अगर किसी मोड़ पे मुलाक़ात हो जाये तो,
हथेली हिला देना दूर से ही देखकर,
पास मत आना, दुनियां सवाल करेगी तीखे,
लेकिन फिर भी कभी,
जब ज़िन्दगी थोड़ी बेपटरी हो जाये,
हालात तुम्हारे प्रतिकूल हो जाये,
तब बेमतलब ही सही,
थोड़ा मुस्कुरा देना,
कुछेक ठहाके यूँ ही लगा लेना,
कुछ पुराने, सुनहरे पन्ने पलट लेना।