Geometry and Love


मैं और तुम दो अलग-अलग बिंदु हैं। हमारे बीच की दूरी अनगिनत बिंदुओं का समावेश है। 
वो अनगिनत बिन्दुएँ हमारे दरम्यान हो रही और होने वाली बातों के सिलसिले हैं,
हर वो शब्द जो मैं बोलता हूँ और तुम सुन लेती हो, हमारे दरम्यान की दूरी को शायद एक बिन्दु कम कर देती है।

जानती हो? वो जो वृत्त हम दोनों बिंदुओं से होकर गुजरती हैं, कह रही थीं कि उनके केंद्र से तुम्हारी दूरी और मेरी दूरी हमेशा बराबर हुआ करती है। 
वृत्तें कह रही थीं कि अगर हम उनकी परिधियों पे एक दूसरे की तरफ चलते रहे तो ज़रूर मिलेंगे। 
और कुछ दरियादिल वृत्तों ने तो हमारी दूरी को देखते हुए चुपके से त्रिज्या के द्वारा संदेश भिजवाया कि हमें उनके जीवा से होकर चलते हुए मिलना चाहिए, 
वो कह रही थीं कि इस बावत हम जल्दी मिल सकेंगे।

लेकिन वो जो तुम्हारी एक दोस्त है, तीसरी बिन्दु जहाँ से हमें जोड़ती एक खास वृत्त पर खीची गयी स्पर्श रेखाओं की लंबाई समान है, 
ने न्यूनतम दूरी के बजाय परिधि के ऊपर चलते हुए मिलने को वज़ाअत फरमाया। 
पर चूँकि वो मेरी भी दोस्त है, इस बावत रहम खा कर कह रही थी कि हम दोनों से होकर गुजरने वाली जिस वृत्त की त्रिज्या अधिकतम हो 
उस वृत की परिधि पर चलकर मिलें तो शायद जल्दी मिल सकेंगे।

अब मैं इस उधेड़बुन में फंसा हूँ कि अधिकतम त्रिज्या तो अनंत हो सकती है, फिर तो हमें हमारी दोस्त ये कह रही है कि सीधी रेखा पे ही चलके मिलो, 
यानी न्यूनतम दूरी ही तय करनी है।

बिंदु - point 
वृत्त - circle 
परिधि - circumference